Monday, March 5, 2012

मुझे देख के मेरे सेहत का अंदाज़ ना लगा...

मेरे मुस्कराहट पे ना जा साथी...
गम दिल में आज भी बहुत है...
हँसना तो अदा है अपनी ...
मुझे देख के मेरे सेहत का अंदाज़ ना लगा ...

नयन हमारे गुस्ताख है, इनको सब कुछ पता है...
दुनिया की दुस्वारी दिल की परेशानी है...
हम आखो से कह जाते है ..
अंदाज ऐ बयां है यही हमारा...

हँसना तो अदा है अपनी ...
मुझे देख के मेरे सेहत का अंदाज़ ना लगा ||

Sunday, January 22, 2012

कोई बहाना नहीं होता

मुस्कुराने के लिये कोई बहाना नहीं होता...
याद करने का कोई जमाना नहीं होता...
दो पल में मिल जाते है दिल...
दिलो को मिलने के लिये वक़्त का अफसाना नहीं होता .....

Wednesday, October 26, 2011

मरके भी हमे खुशिया दे गया...

क्या ये तेरी दोस्ती और कैसा ये तेरा दोस्ताना...
हसता है तू हम पर ऐसे, सुनकर मेरा अफसाना...

तू भी झूठा और ये तेरी दोस्ती भी झूठी...
तूने बहुत है खींचा, तब ये डोर है टूटी....

तुझसे लिपटकर, रोने को जी करता है...
पर तू नहीं है मेरा दोस्त, ये सोचकर दिल रोता है...

ये कविता नहीं मेरा दर्द रो रहा है...
दम तोड़ता इक समंदर रो रहा है ...

हँसो तुम भी .. जमाना हँसता है हम पे...
नमक मेरे जख्मो पे ज़रा तुम भी रगर लो ...

जब कल हम ना रहेंगे...
हमे तुम भी याद करोगे ...
नम आँखों से कहोगे...
कोई था जो मिट गया...
मरके भी हमे खुशिया दे गया...||

इक सन्देश

ॐ हरि .... ॐ हरि ....
दीप जलाओ ... दीप जलाओ ...
किसी के घर संसार में आग ना लगाओ...
चलो सन्मार्ग पे, लो सबकी दुआएं...
दीप जलाओ.....

कल जो तुमने किया है...
सुरसा की तरह बन आएगी सामने....
देखोगे चारो ओर, कोई ना सहायक होगा...
तेरे ही पाप तुझको हर लेंगे....

मानव जन्म लिया है...
मानवता के काम कर...
हाथ बढ़ा, सबको गले लगा...
अच्छे बुरे की चिन्ता तुझे क्यु है...

सब का लेखा जोखा है उसके पास...
इस जनम का कई जनम भरेगा ...
यम गण जब नरक की आग में तलेंगे...
तेरे अच्छे करम ही तब साथ रहेंगे...

दीप जलाओ...
मन के अन्दर का अंधकार मिटाओ...
करो जग में परोपकार ...
थामेंगे तुम्हे पालनहार ... ||हरि ॐ||

Monday, October 24, 2011

दिल की इक कसक चुपके से कह देती है ....

ऐसा क्यु है की वक़्त आज हमे खुद पे हँसता लगता है....
हर चहरे पे छुपा इक मुखौटा लगता है ...
बद्नाशीबी है मेरी या ... वक़्त का कशुर है....
जो भी मिलता है जख्म देता है...

हाथ बढ़ता हू गर किसी की और मदद के लिये...
मिलता है बस इक ही जवाब... आप कौन है...
अब तो हमने खुद पे इतराना भी छोड़ दिया है...
भरोसा था जीन कंधो पे वो कंधे छोड़ दिया है...

अब तो हर आंशू मेरे अपने है..
और उन्हें थामने के लिये कंधे भी अपने है...
कल तक था जो भरोसा वो टूट चूका है...
मै था जिन सपनों में वो सपने छुट चुके है...

मुझे गम इस बात का नही की तू साथ नही...
मुझे गम इस बात का नहीं की अब तेरा आस नही ...
मुझे गम है तो टूटी हुई उस आस का...
मेरे आँगन में सुबकती उस बिश्वास का ....

बिखरे हुए आशाओं का मंज़र बस इतना पूछता है ...
कहा है वो रिश्ते जिनपे तू दंभ करता है....
मै चुप ही रहता हू, कुछ भी ना कहता हू...
पर दिल की इक कसक चुपके से कह देती है...

आस का इक बिज बोया था जिसे आंशू से सींचता हू....2
आस का इक बिज बोया था जिसे आंशू से सींचता हू....2

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Thanks & Regards.

Abhishek Singh

Software Engineer,
E-Connect Solutions Pvt. Ltd.,Udaipur

Wednesday, August 31, 2011

तुझसे बेपनाह मोहब्बत करता हूँ

तेरा प्यार ही तो मेरी जींदगी है ....
जो तेरा प्यार नही तो कुछ भी नहीं....||

दोस्त है, परिवार है या है मेरी आरज़ू...
मेरी रूह है, मेरी तपन है, मेरी सांस है तू...||


कई बार मुझसे हो जाती है ख़ता...
हर ख़ता मंजूर है मुझको...
सजा दे तू मुझे जो चाहे, हक है तेरा...
ना रोकूंगा मै तुझको ... ||

मै तो मुशाफिर हूँ... मंजिल है तू मेरी ...
मार्गदर्शन तो कर आके सही...
तुझसे तुझ तक पहुचने का रास्ता पूछता हूँ ...
तुझसे बेपनाह मोहब्बत करता हूँ ... ||


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31-August-2011,


Abhishek Singh

Software Engineer,

E-Connect Solutions Pvt. Ltd.,Udaipur

Saturday, August 20, 2011

दो चार ही मिले

मै अकेला चला, चलता रहा ....
जाने कब लोगो का कारवां बना ...
कुछ हमराही मिळे ...
कुछ दो कदम भर चले....
पर जो ढंग से मिले मेरे होके चले ....
कुछ ने जाना हमें नजदीक से ....
तो कुछ दूसरो से मेरा हाल पूछते रहे ...
दो चार ही मिले पर अच्छे मिले ...
दो चार ही मिले पर सच्चे मिले ...
आज तक भी जो साथ चलते रहे...